Kahani ka kona

Month: August 2020

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खाली रह गया ‘खल्या’..

   हर रोज़ फ़रदू यही सोचता कि आज वो अपने खल्ये में कुछ पैसा तो बचाएगा ही। लेकिन रात को जब घर आता तो उसका खल्या खाली ही रह जाता।…

‘समानता’ का शोर क्यूं…?

     आज महिला समानता दिवस है…. क्यूं हम एक स्वर में इस दिन चिल्लाने लगते हैं कि महिलाओं को  ‘समानता दो’..’समानता दो’…। क्यूं ये एक शब्द इस दिन मुखर हो…

आख़री ख़त प्यार के नाम…

         आख़री—आख़िरी             न जाने वक़्त कब यूं ही गुज़रता चला गया। कितना सुकून था उस पल में जब बेफिक्र सुबह और…

74 साल का ‘युवा भारत’

यूं तो वक्त की गाड़ी पर सवार होकर आज़ादी की उम्र बढ़ रही हैं लेकिन ये व्यक्ति की उम्र की तरह बूढ़ी नहीं हुई हैं। बल्कि इसके यौवन में बढ़ोतरी…

ज़िंदगी का फ़लसफ़ा

     सोमित बाबू बंगाली भाषा के लेखक है। लेकिन हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी और फ़ारसी में भी उनकी अच्छी खासी पकड़ है। वे एक ख़्यातनाम लेखक है। उनकी ऐसी कोई…

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