Kahani ka kona

Month: June 2021

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मेरी ‘चाहतों’ का घर…

दफ्तर की खिड़की से झाँकता हुआ सूरज ठीक मेरे सामने कुछ इस तरह आ गया मानों कह रहा हो अलविदा ! कल फिर आऊँगा । मैं टकटकी लगाए हुए डूबते…

बजता रहे ‘भोंपू’….

     कोरोना संक्रमण की गति कम होने से देश अब फिर काम पर लौट रहा हैं निश्चित ही ये एक ‘शुभ’ संकेत हैं। लेकिन इसके बावजूद लोगों में ‘कोरोना…

‘ओलंपिक ‘ — कितना सही ….?

 इंटरनेशनल ओलंपिक—डे क्या हम भूल रहे हैं कि हम एक ऐसे जहाज पर सवार हैं जो कोरोना तूफान से डगमगा रहा हैं…। क्या हम वाकई ये भूल बैठे हैं कि…

‘फटी’ हुई ‘जेब’….

आज ‘फादर्स—डे’ हैं। ये दिन पिता के प्रति अपनी कृतज्ञता दिखाने का ​सिर्फ एक माध्यम हैं। निश्चित ही बदलते वक़्त के साथ आज एक गंभीर और कड़क स्वभाव वाले पिता…

कबिलाई— एक ‘प्रेम’ कथा

    जोरों की बारिश आज मानो शंकरी के जी को जला रही थी…कहने को मौसम सुहाना हो गया था लेकिन भीतर की आग ने शंकरी को सोहन की याद…

एक पुराना ‘हैंडपंप’..पार्ट—2

  सत्यप्रकाश अपनी आप-बीती को मित्र के साथ साझा करने में सकुचा रहे थे । उन्हें पूरा भरोसा था कि उनकी बात पर सब उनका मख़ौल उड़एंगे। मन ही मन…

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