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Month: July 2021

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‘मुंशी प्रेमचंद’—जन्मदिन विशेष

     ‘हल्कू ने आकर स्त्री से कहा—सहना आया है, लाओ, जो रुपए रखे हैं, उसे दे दूं, किसी तरह गला तो छूटे’…।         ये पंक्तियां हिन्दी के महान…

कबिलाई— एक ‘प्रेम’ कथा…. भाग—4

        उसे कुछ संशय हुआ…वह तेज कद़मों के साथ शंकरी की ओर बढ़ा। उसे अपनी तरफ़ आता हुआ देख शंकरी ने फोरन अपने आंसू पोंछे और वह…

कबिलाई— एक ‘प्रेम’ कथा… भाग—3

 तंबू  के भीतर दोनों अकेले थे, ये वो मौका था जिसके लिए सोहन तरस रहा था…। उसने बिना समय गवाए शंकरी से पूछा…आख़िर ये सब क्या हो रहा हैं शंकरी…।…

ठहर जाना ऐ, ‘इंसान’…..

 ‘ललाट’ पर जब घमंड तमतमाने लगे, ‘प्रेम’ की जगह कुटिल हंसी जब आलिंगन करने लगे..।      ख़ुद ही की जब तारीफ़े पसंद आने लगे, औरों का ‘वजूद’ ही जब…

‘रबर—पेंसिल’ ….

    बड़ी ही हैरानी की बात हैं, जिस जनरेशन ने अपना बचपन  अभी पूरा नहीं जिया है वो ही ‘जनरेशन’ कह रही हैं ‘क्या दिन थे वो’….। ‘जब हम…

कबिलाई— एक ‘प्रेम’ कथा…. भाग—2

 मध्यम धूप खिलने लगी…बीती रात जो तूफान—बारिश आई थी उस पर ‘मखमली’ धूप की चादर बिछ गई…ऐसा लगा मानो तूफान सिर्फ सोहन को कबिलाईयों के बीच लाने भर के लिए…

मेरी ‘चाहतों’ का घर…भाग—2

‘कहानी का कोना’ में पढ़िए लेखिका वैदेही वैष्णव ‘वाटिका’ द्वारा लिखित कहानी का दूसरा भाग  ‘मेरी चाहतों का घर’…।  जिस प्रश्न को सुनकर मैं चिढ़ जाया करतीं हुँ वहीं प्रश्न…

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