‘प्रतीक्षा है कविता’…

by teenasharma
कविता-प्रतीक्षा-है-कविता

                    ‘कहानी का कोना’ में आज पढ़िए कवयित्री ‘नूतन गुप्ता’ की लिखी कविता, ‘प्रतीक्षा है कविता’…। इनका जन्म 22 अगस्त 1953 को मत्स्य क्षेत्र ‘अलवर’ में हुआ..। स्कूल और कॉलेज की शिक्षा इन्होंने जयपुर से प्राप्त की…। कवयित्री हिन्दी एवं अंग्रेज़ी साहित्य में समान रुप से रुचि रखती हैं…। इनकी पुस्तकें  ‘जुगनू मेरे शब्द’, ‘कम है तो अच्छा है’ और ‘शेड्स’…में अभिव्यक्ति के कई रंग शामिल हैं…। विभिन्न पत्र—पत्रिकाओं में इनके लेख व कविताएं भी प्रकाशित होते रहे हैं..साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए इन्हें ‘अपराजिता सम्मान’ से सम्मानित किया गया हैं…। ये विभिन्न प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक आयोजनों में भी सक्रिय हैं…।

 

  ‘प्रतीक्षा है कविता’… 

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खचाखच भरे सभागार में
बीचों बीच ख़ाली कुर्सियाँ
दरअसल ख़ाली नहीं होती
मेज़बान की आँखों में

उनके भरे जाने की प्रतीक्षा की कविता
तैरती दिखाई देती है।
लिखी जाने वाली कविता
प्रतीक्षा से बहुत पीछे बहुत सतही है

              नूतन गुप्ता

जो प्रेम करने से डरते हैं
वे प्रेम कविता लिखते हैं
परिवार में बेहद बंधी स्त्री
आज़ादी पर लिखती है

अकेला व्यक्ति
किसी का साथ लिखता है
कोई ग़म भुलाने को लिखता है
कोई किसी की याद में।

विधवाएँ
बिंदी सिंदूर और सुहाग लिख रही हैं
सुहागन

बिछुए पायल चूड़ी से आज़ादी पर
क्रांतिकारी स्त्री विमर्श लिख रही है

दरअसल
जो हमारे पास है

उससे उल्टा चाहिए हमें।
वही पाने की प्रतीक्षा का नाम है ‘कविता’

   कवयित्री— नूतन गुप्ता

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कभी ‘फुर्सत’ मिलें तो…

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धन्यवाद

 

 

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9 comments

शिवानी April 30, 2022 - 11:08 am

आह् से आह्हा तक…
बहुत सुंदर कविता

Reply
teenasharma April 30, 2022 - 5:32 pm

ji thankyu

Reply
shailendra sharma April 30, 2022 - 1:41 pm

wah bahut sunder

Reply
teenasharma April 30, 2022 - 5:31 pm

ji thanku

Reply
गढ़िए एक 'झूठी कहानी' - Kahani ka kona April 30, 2022 - 6:13 pm

[…]  'प्रतीक्षा है कविता'… […]

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कविता 'नई पौध' - Kahani ka kona May 4, 2022 - 4:49 am

[…]  'प्रतीक्षा है कविता'… […]

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कविता 'मां' - Kahani ka kona May 8, 2022 - 5:12 am

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गूंगी कविता - Kahani ka kona May 27, 2022 - 8:59 am

[…]  'प्रतीक्षा है कविता'… […]

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कविता—दरवाज़े से जब - Kahani ka kona December 19, 2022 - 10:25 am

[…] ‘मां’ कविता ‘नई पौध’ मंगला  ‘प्रतीक्षा है कविता’… ‘अपने—अपने अरण्य’ “बातशाला” […]

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मैं अपने ब्लॉग kahani ka kona (human touch) पर आप सभी का स्वागत करती हूं। मेरी कहानियों को पढ़ने और उन्हें पसंद करने के लिए आप सभी का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं। मैं मूल रुप से एक पत्रकार हूं और पिछले सत्रह सालों से सामाजिक मुद्दों को रिपोर्टिंग के जरिए अपनी लेखनी से उठाती रही हूं। इस दौरान मैंने महसूस किया कि पत्रकारिता की अपनी सीमा होती हैं कुछ ऐसे अनछूए पहलू भी होते हैं जिसे कई बार हम लिख नहीं सकते हैं।

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