Kahani ka kona

गढ़िए एक ‘झूठी कहानी’

गर पाना हैं, ‘अपनापन’  तो गढ़िए एक ‘झूठी कहानी’ अपनी…। गर ख़्वाहिशें हैं, किसी ‘अपने’ की तो गढ़िए एक झूठी कहानी।                अमीरी नहीं बल्कि,…

‘मीत’….

पढ़िए लेखिका ‘वैदेही वाटिका’ द्वारा लिखित कहानी ‘मीत’…।   मुझे गाने सुनते हुए काम करने की आदत हैं। आज भी जब मैं अपने कमरें की सफ़ाई कर रहीं थीं तब आदतन…

रानी लक्ष्मीबाई जयंती—-

‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी बुंदेलों हर बोलो के  मुंह हमने सुनी कहानी थी…।       याद होगी आपको ये पंक्तियां…। जिसे कवयित्री ‘सुभद्रा कुमारी चौहान’ ने…

यूं तेरा ‘लौटना’…

   यूं तेरा ‘लौटना’ बेशक एक नई शुरुआत है जिसमें ख़ुद से ख़ुद की मुलाकात है। तेरा ‘लौटना’ बेशक आत्मा का एक ‘सुकून’ है,….।      उस भोली सुबह की पहली…

‘पारंपरिक खेल’ क्यों नहीं…?

‘बाल दिवस’ पर विशेष——— ये कहानी हैं एक ऐसे बचपन की जिसमें धूल और मिट्टी से सने हाथ और पैर हैं…। ये कहानी हैं एक ऐसे अल्हड़पन की जो बेफिक्र…

कबिलाई एक ‘प्रेम—कथा’…भाग—8

…’मेरे बेटे की जान तो ले ली तुमने अब इसकी लाश पर से मेरा हक मत छीनो…। इसे लेकर मुझे जाने दो’…। सरदार ने फोरन अपने भाई को सोहन की…

कबिलाई एक ‘प्रेम—कथा’…भाग—7

…….लेकिन कबिलाईयों ने उसे अपने बेटे सोहन के पास नहीं जाने दिया…ये देखकर शंकरी चिल्ला उठी…बस करो….। सारे के सारे एक निहत्थे पर टूट पड़े…बूढ़ी मां ने तुम सबका क्या…

कबिलाई एक ‘प्रेम—कथा’…भाग— 6

कबिलाई एक जीप को घेरेे खड़े हैं…और हवा में खंजर…चाकू…दांती..कुदाली लहरा रहे हैं…। भीखू सरदार और उसका भाई नौ बरस से जिस दिन के इंतज़ार में थे वो इस वक़्त…

कबिलाई एक ‘प्रेम—कथा’… भाग—5

      आज बरसों बाद मौसम ने घना काला चौला ओढ़े हुए अपनी बाहों में बारिश को भर लिया था जैसे….हर गर्ज़ना पर उसकी आह सुनाई दे रही मानो…।…

‘विश्व हृदय दिवस’

अकसर हम सुनते हैं और कहते भी हैं कि, आज मेरे सीने में दर्द हो रहा हैं…या आज सुबह से ही मेरे बाएं हाथ में अजीब सा दर्द या झंझनाहट…

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