ह से हिंदी

कवियित्री

by teenasharma
ह से हिंदी

‘कहानी का कोना’ में चल रही लेखक व साहित्यकार श्रेणी—2 में आज पढ़िए वरिष्ठ लेखक व पत्रकार मणिमाला शर्मा की लिखी कविता ह से हिंदी….।

होंठो से फूलों की मानिंद झर जाए।
हाथों में कलम की धार बन जाए।।

हिंदी है हिंदुस्तान के माथे की बिंदी।
हम में उत्साह जगाए बनकर सहयोगी।।

 

ह से हिंदी 

ह से हिंदी मातृ भाषा है हमारी।
हिंदी से ही हो पहचान हमारी।।

होंठो से फूलों की मानिंद झर जाए।
हाथों में कलम की धार बन जाए।।

हिंदी है हिंदुस्तान के माथे की बिंदी।
हम में उत्साह जगाए बनकर सहयोगी।।

हित सबका इसको धारण करने में।
होंगे सफल इसका वरण करने में।।

ह से हिंदी

मणिमाला शर्मा

हिय में हमारे बसी है इसकी खुशबू।
हो जाए इस भाषा को पढ़ मन बेकाबू।।

हिंदी में सुनिए दीपक राग,कजरी, मेघ मल्हारी।
हिंदी के दोहे, छंद , मुक्तक और चौपाई हैं सब पे भारी।।

हिंद की आन बान शान का नाम है हिंदी।
हिमालय के स्वाभिमान का नाम है हिंदी।।

हिंदी से सब को है प्यार चाहे हो देशी या प्रवासी।
हुलसे मन विदेश में जब कानों में पड़े भाषा अपनी सी।।

है अभिमान मुझे हिंदी भाषी होने पर।
हिंदी के शब्दों में अपने भाव व्यक्त करने पर।।

हिंदी की कसम आज हम खाते है।
हमारे गौरव को आज पुनर्स्थापित करते हैं।।

हिमालय से लेकर नीलगिरी तक सब के मुंह में हिंदी हो।
हमारे देश के आत्मसम्मान की राह बस हिंदी हो।।

 

 मणिमाला शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक
जयपुर, राजस्थान

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धन्यवाद
टीना शर्मा ‘माधवी’
(एडमिन)

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