शाहरुख मुसलमान इसलिए विरोध

jaipur literature festival

by teenasharma
शाहरुख मुसलमान इसलिए विरोध

शाहरुख मुसलमान इसलिए विरोध

 

शाहरुख मुसलमान इसलिए विरोध हो रहा है फिल्म का। ‘बॉलीवुड की बुनियाद सेशन’ में फिल्म समीक्षक, अजीत राय ने फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) के विरोध को बेबुनियाद बताया।

उन्होंने कहा कि ये विरोध फिल्म पठान का नहीं हो रहा बल्कि, शाहरुख खान (shahrukh khan) का हो रहा है। शाहरुख मुसलमान नहीं होते तो उनका विरोध नहीं होता। ये ‘मैनुफेक्चर्ड प्रोटेस्ट’ हैं जिसका समर्थन नहीं किया जा सकता हैं। उन्होंने ये भी कहा कि, एक फिल्म क्रिटिक के रुप में, मैं किसी भी तरह की सेंसरशिप के ख़िलाफ हूं। पूरी दुनिया में कहीं भी सेंसरशिप नहीं हैं।

 

  साहित्य के महाकुंभ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (jaipur literature festival) में  साहित्य नोबेल पुरस्कार (Literature Nobel Prize) से सम्मानित लेखक अब्दुलरज़ाक गुरनाह (abdul razak gurnah)  ने ‘कीनोट’ एड्रेस दिया। 

शाहरुख मुसलमान इसलिए विरोध

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल

उन्होंने कहा कि, ‘लेखन निरंतर चलने वाली प्रकिया का नाम है। ये आपकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए…। लिखते वक्त आप ये मत सोचो कि आपको किसी की प्रेरणा बनना है, या आपको कोई अवार्ड मिलेगा, या आपको कभी नोटिस भी किया जायेगा। आपको बस भटकाव से दूर रहते हुए लिखना है। और यही सच है… इस प्रक्रिया में आप उन विचारों और विश्वासों को सहज पाएंगे जो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं और मायने रखते हैं। उनके इस सादगीपूर्ण वक्तत्व ने श्रोताओं का दिल जीत लिया।

                                            ‘ बता दें कि, गुरनाह लेखन के साथ-साथ कैंट यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के प्रोफेसर भी रहे हैं।

शाहरुख मुसलमान इसलिए विरोध

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल

जेएलएफ (jlf 2023) इंटरनेशनल बुकर से सम्मानित कृति ‘रेत समाधि’ की लेखिका गीतांजलि श्री (Geetanjali Shree) और उनकी अनुवादक डेजी रॉकवेल के नाम रहा। डेजी रॉकवेल ने ‘रेत समाधि’ (Tomb of Sand) का अनुवाद ‘टुम्ब ऑफ़ सैंड’ शीर्षक से किया है। यह उपन्यास एक 80 साल की महिला के माध्यम से विभाजन और उससे उत्पन्न त्रासदी की कहानी को रोचकता से बयां करता है।

अपने ज़माने की मशहूर अभिनेत्री दीप्ती नवल ने अपनी आने वाली किताब, ‘ए कंट्री कॉल्ड चाइल्डहुड’ पर बात की। आत्मकथा होते हुए भी ये किताब उस देश की कहानी कहती है, जिसे दीप्ती ने अपना बचपन कहा है।

इस अवसर पर उन्होंने कहा, “जब मैंने अपने बचपन के बारे में लिखना शुरू किया, तो मैं सिर्फ अपने बारे में नहीं, बल्कि उस समय के बारे में लिखना चाह रही थी, जो मैंने जिया था… इस किताब में वो कहानियां हैं जिन्हें मैंने नहीं, बल्कि उन कहानियों ने मुझे गढ़ा है।”

फेस्टिवल के प्रोडूसर, संजॉय के. रॉय ने कहा, “आज से 16 साल पहले, जब डिग्गी पैलेस के दरबार हॉल में हमने इस सपने की शुरुआत की थी, तब सोचा भी नहीं था कि एक दिन यह फेस्टिवल दुनिया का सबसे बड़ा साहित्यिक शो बन जाएगा। हम चाहते थे कि एक ऐसे माहौल को गढ़ा जाए, जहां युवा और छात्र ख़ुद साहित्यकारों से संवाद कर सकें।”

फेस्टिवल के 16वें संस्करण का आगाज़, कर्नाटिक संगीत की पुरस्कृत गायिका, सुषमा सोमा के सुमधुर स्वरों से हुआ। उन्होंने कन्नड़, तमिल और बांग्ला कवियों की कुछ यादगार कविताओं को अपने सुरों में पिरोकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया|

 शाहरुख मुसलमान इसलिए विरोध

संजॉय के.रॉय

 

शाहरुख मुसलमान इसलिए विरोध

दीप्ति नवल

 

 शाहरुख मुसलमान इसलिए विरोध

उषा उथुप

फेस्टिवल का पहला दिन साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखिका अनामिका(Anamika ) ,अलका सरावगी, बिबेक देबरॉय, पुष्पेश पंत, शशि थरूर, नमिता गोखले, दीप्ति नवल, उषा उथुप, गीतांजलि श्री और डेजी रॉकवेल के नाम रहा। 

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल से जुड़ी ख़बरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें—

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2023

 

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बाहुबली - Kahani ka kona January 28, 2023 - 7:23 am

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