कविता ‘मां’

by teenasharma
कविता 'मां'

यूं तो हर दिन ‘मां’ का हैं…फिर भी उसे किसी एक दिन ‘स्पेशल फील’ कराने के लिए ‘मदर्स—डे’ को सेलीब्रेट करना ‘अच्छा ही तो हैं’…इसे एक बहाना ही मान लिजिए…पर ‘ये अच्छा हैं’…और इसी पॉजिटीव थिंकिंग के साथ आज यानि मदर्स—डे स्पेशल में पढ़िए कवि, लेखक, प्रेरक और चिंतक डॉ.बजरंग सोनी की लिखी कविता ‘मां’…।

लेखक ‘बेटी बचाओ एवं नारी सम्मान’ की मुहिम से जुड़े हुए हैं..वे सेवानिवृत्त वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं एवं कई पत्र—पत्रिकाओं में उनकी कविताएं, कहानियां एवं व्यंग्य प्रकाशित होते रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में वे कई प्रांतीय एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित है। इसमें अखिल ‘भारतीय शब्द​ निष्ठा सम्मान’, इंडो—जापान डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के ‘काव्य बोधांजलि’ व ‘कथा वासन्ती’ आदि शामिल हैं…। हाल ही में इनकी क़िताब ‘मन की टकसाल’ प्रकाशित हुई हैं..।

कविता 'मां'

                डॉ. बजरंग सोनी

‘मां’

आरोह-अवरोह
निर्दोष विधान
बांहों का झूला
पलकों का आसमान

सूरज सी आदत
चांद सी बात
सुबह की जिद
शाम की सौगात

दरिया के आर-पार
दीपक हजार
छोटा सा घर
बहुत बड़ा संसार

नित नई आस
सांसों के आसपास
काजल लिखी कहानी
सपनों का उपन्यास

डॉ बजरंग सोनी, जयपुर

कुछ और कविताएं पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें—

 ‘प्रतीक्षा है कविता’…

सपनों की दे​ह पर…..

कविता ‘नई पौध’

‘दोस्ती वाली गठरी’ …..

प्रिय,

पाठकगण आपको ये कविता कैसी लगी ज़रुर लिखकर भेजें। ब्लॉग का कंटेंट आपको कैसा लग रहा हैं ये भी लिखकर भेजें, इससे ब्लॉग को और बेहतर बनाने की प्रेरणा मिलेगी।
धन्यवाद

 

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5 comments

शिवानी May 8, 2022 - 9:47 am

अलग सी कविता ❤️❤️
कविताओं की भीड़ में अपने आप जगह बनाती सुंदर कविता के लिए बधाई और शुभकामनाएँ 💐💐

Reply
teenasharma May 9, 2022 - 11:28 am

थैंक्यूं शिवानी जी

Reply
'सर्वाइवल से सेविअर' तक….. - Kahani ka kona May 17, 2022 - 11:09 am

[…] कविता 'मां' […]

Reply
गूंगी कविता.... - Kahani ka kona June 5, 2022 - 2:35 am

[…] कविता 'मां' […]

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ग़ज़ल-निरुपमा चतुर्वेदी - Kahani ka kona December 16, 2022 - 11:47 am

[…] सूचकांक… ऐसे थे ‘संतूर के शिव’ कविता ‘मां’ कविता ‘नई पौध’ मंगला […]

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मैं अपने ब्लॉग kahani ka kona (human touch) पर आप सभी का स्वागत करती हूं। मेरी कहानियों को पढ़ने और उन्हें पसंद करने के लिए आप सभी का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं। मैं मूल रुप से एक पत्रकार हूं और पिछले सत्रह सालों से सामाजिक मुद्दों को रिपोर्टिंग के जरिए अपनी लेखनी से उठाती रही हूं। इस दौरान मैंने महसूस किया कि पत्रकारिता की अपनी सीमा होती हैं कुछ ऐसे अनछूए पहलू भी होते हैं जिसे कई बार हम लिख नहीं सकते हैं।

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