‘दोस्ती वाली गठरी’ …..

by Teena Sharma Madhvi

 बरसों बाद खोली हैं एक ‘गठरी’

उठाकर देखा तो अब भी बेहद हल्की सी लगी…। 

मन चाहा इसे कांधे पर लटका लूं

मगर रिश्तों से भरी पड़ी गठरियों ने 

कांधे पर कोई जगह ही न छोड़ी थी…।

 

    

        आज इन लदी पड़ी गठरियों ने ही 

      रह—रहकर कांधे झूकने का अहसास कराया …। 

      तब ‘हल्की’ गठरी की याद आ गई।   

      जिसे बरसों बाद यूं खोलने को मन तरसा हैं..। 

वो अल्हड़ मस्ती,

बात—बात पर निकलें ठ​हाकों की गूंज 

गुस्सा आने पर भी  यूं पास बैठे रहना

गलती होने पर भी साथ देना

नहीं मानने की ज़िद पर भी बार—बार समझाते रहना

हमेशा ‘परफेक्ट’ कहकर हौंसला बढ़ाना

झिड़कियां देने पर भी मुंह न फेरना…। 

हार जाने को भी सेलिब्रेट करना

और बार—बार ये पूछते रहना तू ठीक तो हैं ना…?

ये हैं ‘दोस्त’ और उसकी ‘दोस्ती’…।

इत्ते पर भी कोई अपेक्षा न रखना…। 

 वाह रे! दोस्ती वाली गठरी…।

सबकी ख्वाहिशों को पूरा करते—करते

न जानें कब हाथ से छूट गई दोस्ती वाली गठरी..।

न जानें कब छूट गए दोस्त

जो आंखों में आंसू की एक बूंद तक न आने देते

न जानें कहां चले गए वो सारे ‘दिल’

जो ‘आत्मियता’ से जुड़े हुए थे…। 

अब भी ​बंधी पड़ी हैं वो 

सारीं खुशियां,

 जो चेहरे पर मुस्कान दे जाती हैं…। 

यही तोहफा तो हैं ‘फ्रेंडशिप डे’ का…

जिसे दोस्ती की गहरी यादों ने सजाए रखा हैं 

जो ख़जाना बनकर अब भी बाकी हैं

 ‘दोस्ती वाली गठरी’ में….। 

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11 comments

कैलाश मनहर August 1, 2021 - 1:50 pm

बहुत संवेदनापूर्ण कविता है | सब की यही स्थिति है किन्तु आपने शब्दों में ढाल कर कहा | अच्छी लगी |

Reply
Prashant sharma August 1, 2021 - 1:55 pm

क्या कहूं शब्द नहीं है। बहुत ही शानदार अभिव्यक्ति।

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Vaidehi-वैदेही August 1, 2021 - 2:02 pm

बहुत ख़ूब 👌🏻

Reply
Anonymous August 1, 2021 - 5:34 pm

Beautifully expressed feelings ��

Kumar Pawan

Reply
Teena Sharma 'Madhvi' August 1, 2021 - 5:56 pm

Thankyou🙏

Reply
Teena Sharma 'Madhvi' August 1, 2021 - 5:56 pm

🙏🙏

Reply
Teena Sharma 'Madhvi' August 1, 2021 - 5:57 pm

Thankyou🙏

Reply
Teena Sharma 'Madhvi' August 1, 2021 - 5:58 pm

धन्यवाद सर🙏

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गढ़िए एक 'झूठी कहानी' - Kahani ka kona June 9, 2022 - 5:53 am

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कभी 'फुर्सत' मिलें तो... - Kahani ka kona June 10, 2022 - 9:34 am

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