‘मां’ ही तो होती है पहला गुरु….

by Teena Sharma Madhvi

       आज गुरु पूर्णिमा है और इस पावन पर्व पर उन सभी गुरु और जीवन को बेहतर एवं शिक्षित बनाने वालों को प्रणाम और नमन करता हैं दिल। हर व्यक्ति के जीवन का पहला गुरु ‘मां’ ही होती हैं। जो न सिर्फ हमें अच्छे और बुरे का फर्क बताती हैं बल्कि जीवन के हर छोटे—बड़े संघर्षो से लड़ना भी सीखाती है। वरना हम और आप एक काबिल इंसान नहीं होते। 

        हम जहां हैं और जैसे हैं…उसके पीछे ‘मां’ का प्यार, दुआएं और आशीर्वाद ही है। मां की भावनाओं का सम्मान करें क्योंकि दुनिया में सिर्फ ये ही एक रिश्ता है जो आपको सिर्फ देता हैं और बदले में आपसे कुछ नहीं मांगता। इस भावनात्मक रिश्ते को हमेशा संजोकर रखें…। 
      गुरु पूर्णिमा के अवसर पर राजस्थान पत्रिका में आज मेरी कहानी ‘मां’ की भावनाओं का टोटल इन्वेस्टमेंट प्रकाशित है। इसका लिंक भी शेयर कर रही हूं। 

https://www.kahanikakona.com/2020/06/blog-post_25.html
    

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मैं अपने ब्लॉग kahani ka kona (human touch) पर आप सभी का स्वागत करती हूं। मेरी कहानियों को पढ़ने और उन्हें पसंद करने के लिए आप सभी का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं। मैं मूल रुप से एक पत्रकार हूं और पिछले सत्रह सालों से सामाजिक मुद्दों को रिपोर्टिंग के जरिए अपनी लेखनी से उठाती रही हूं। इस दौरान मैंने महसूस किया कि पत्रकारिता की अपनी सीमा होती हैं कुछ ऐसे अनछूए पहलू भी होते हैं जिसे कई बार हम लिख नहीं सकते हैं।

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