'मां' ही तो होती है पहला गुरु....


       आज गुरु पूर्णिमा है और इस पावन पर्व पर उन सभी गुरु और जीवन को बेहतर एवं शिक्षित बनाने वालों को प्रणाम और नमन करता हैं दिल। हर व्यक्ति के जीवन का पहला गुरु 'मां' ही होती हैं। जो न सिर्फ हमें अच्छे और बुरे का फर्क बताती हैं बल्कि जीवन के हर छोटे—बड़े संघर्षो से लड़ना भी सीखाती है। वरना हम और आप एक काबिल इंसान नहीं होते। 

        हम जहां हैं और जैसे हैं...उसके पीछे 'मां' का प्यार, दुआएं और आशीर्वाद ही है। मां की भावनाओं का सम्मान करें क्योंकि दुनिया में सिर्फ ये ही एक रिश्ता है जो आपको सिर्फ देता हैं और बदले में आपसे कुछ नहीं मांगता। इस भावनात्मक रिश्ते को हमेशा संजोकर रखें...। 
      गुरु पूर्णिमा के अवसर पर राजस्थान पत्रिका में आज मेरी कहानी 'मां' की भावनाओं का टोटल इन्वेस्टमेंट प्रकाशित है। इसका लिंक भी शेयर कर रही हूं। 

https://www.kahanikakona.com/2020/06/blog-post_25.html
    

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