74 साल का 'युवा भारत'

यूं तो वक्त की गाड़ी पर सवार होकर आज़ादी की उम्र बढ़ रही हैं लेकिन ये व्यक्ति की उम्र की तरह बूढ़ी नहीं हुई हैं। बल्कि इसके यौवन में बढ़ोतरी होती जा रही हैं।  इसका आंकलन देश के सर्वांगीण विकास के माध्यम से कर सकते हैं। 

  जैसे पहले मनोरजंन का एक मात्र साधन था— रेडियो। फिर आया रिकॉर्डर, ग्रामोफोन, टीवी, रिकार्डॅर, टेप, म्यूजिक सिस्टम। और अब हाथ में मोबाइल के रुप में पूरी दुनिया... यानि दुनिया मुठ्ठी में आ गई। सबकुछ एक मोबाइल में ...चाहे वो फोन करने से लेकर किसी भी तरह का गाना सुनना हो, देखना हो, गूगल सर्चिंग से लेकर सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म...।

पहले दूसरे देश या परदेश में बैठे अपने सगे संबंधियों से बात करने के लिए ट्रंककाल बुक करवाना पड़ता था, लेकिन आज बात करने के लिए कई साधन हैं।  

   इस तरह डाक विभाग में बदलाव, अख़बार को पढ़ने का तरीका, बस, ट्रेन और हवाई जहाज का सफर ....। पहले रील कैमरा, अब डिजिटल कैमरा, मोबाइल कैमरा, ड्रोन कैमरा । पैमेंट का पेटर्न पूरा डिजिटल हो गया, अब आपको जेब में एक रुपया रखने की जरुरत नहीं। यानि की पर्स रखने की मजबूरी से आजादी। सरकारी तंत्र का सारा काम अब ऑनलाइन हो चुका हैं। 

 इस तरह से 1947 का भारत और 2020 का भारत पूरी तरह से बदल गया हैं। इसलिए 73 साल का भारत अब युवा भारत हैं। 

       बस ज़रुरत है तो इस आज़ादी के यौवन को संभालकर रखने की। सही मायने में आज़ादी का मतलब भी तो यही है। ये कतई नहीं कि हम किंतु—परंतु की विचारधारा के अपने तरीकों से इसे मैला कर दें। क्यूं इन झमेलों में फंसकर इस आज़ादी को खुलकर न जिएं...क्यूं छींटाकशी के पेंच में ख़ुद को उलझाएं...आज़ादी हमारी हैं जो हमें अपनो को खोकर मिली हैं...। तो बस इसके महत्व को समझे और इसके रुप को और निखारें...। आज देश के लिए मरने की नहीं बल्कि देश के लिए जीने की ज़रुरत हैं। 

                                                        जय हिंद जय भारत                                                

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