ठहर जाना ऐ, ‘इंसान’…..

by Teena Sharma Madhvi

 ‘ललाट’ पर जब घमंड तमतमाने लगे,

‘प्रेम’ की जगह कुटिल हंसी जब आलिंगन करने लगे..। 

    ख़ुद ही की जब तारीफ़े पसंद आने लगे,

औरों का ‘वजूद’ ही जब बौना लगने लगे…। 

    तब ठहर जाना ऐ, ‘इंसान’

देख लेना अपना ‘गिरेबान’ भी कभी…।

  जिस पर जमा है बरसों का ‘मैलापन’ कहीं

जो औरों को कम आंकते—आंकते 

अब बन चुका हैं ‘काई’…। 

    ख़ुद की ‘सड़न’ भी सुंघ लेना कभी

तभी महसूस होगी औरों की ‘ख़ुशबू’ कभी….। 



मत भटक फ़ितरतबाज़ी में,

चार पल की ही तो हैं ​जिंदगानी…।

जी भर जी लें, ख़ुद ही के अफसानों संग 

क्या ख़बर ‘इसका—उसका’ में 

ग़ुजर न जाए ये शाम मस्तानी…।

ठहर जाना ऐ, ‘इंसान’

  टीना शर्मा ‘माधवी’

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7 comments

कैलाश मनहर July 20, 2021 - 4:39 pm

सही कहन

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Teena Sharma 'Madhvi' July 20, 2021 - 5:20 pm

धन्यवाद सर

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Secreatpage July 20, 2021 - 5:46 pm

बढ़िया है

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Teena Sharma 'Madhvi' July 21, 2021 - 5:49 am

थैंक्यू

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Anonymous August 11, 2021 - 4:02 am

Nicely written thought

Kumar Pawan

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पुष्पेंद्र सिंह "मुसाफ़िर" September 5, 2021 - 9:03 pm

बेहतरीन

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कविता 'नई पौध' - Kahani ka kona May 4, 2022 - 4:52 am

[…] ठहर जाना ऐ, 'इंसान'….. […]

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मैं अपने ब्लॉग kahani ka kona (human touch) पर आप सभी का स्वागत करती हूं। मेरी कहानियों को पढ़ने और उन्हें पसंद करने के लिए आप सभी का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं। मैं मूल रुप से एक पत्रकार हूं और पिछले सत्रह सालों से सामाजिक मुद्दों को रिपोर्टिंग के जरिए अपनी लेखनी से उठाती रही हूं। इस दौरान मैंने महसूस किया कि पत्रकारिता की अपनी सीमा होती हैं कुछ ऐसे अनछूए पहलू भी होते हैं जिसे कई बार हम लिख नहीं सकते हैं।

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