Kahani ka kona

Month: June 2020

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‘झम्मक’ लड्डू

         चिलचिलाती धूप…माथे से टपकता पसीना…और बेसब्र आंखों से बल्लू का इंतजार करना। ये सिर्फ एक दिन की ही बात नहीं थी। बल्कि रोज़ाना ही भरी दोपहरी…

ज़िदगी का दुश्मन है नशा

      राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि  ‘नशा मानव बुद्धि और शरीर के साथ—साथ उसकी आत्मा को भी नष्ट कर देता हैं।’  गांधी जी की ये बात…

‘मां’ की भावनाओं का ‘टोटल इन्वेस्टमेंट’

      हर सुबह की तरह आज की सुबह न थी। आज ना तो सूरज की किरणें घर के भीतर झांक रही थी और ना ही धूपबत्ती की खुशबू…

‘पिता’ को बलिदान का तोहफा….

      दिल रो रहा है…आत्मा फट रही हैं….आंसूओं का सैलाब है जो थमने का नाम ही नहीं ले रहा हैं। जिन कांधों पर बैठाकर उसे बचपन में घुमाया था…आज…

‘सैनिक’ सीमा पर, देश के अंदर ‘हम’ मोर्चे पर…

    जिस तरह से हमारे बहादुर सैनिक हमारे देश की सीमा पर चाइना से लोहा ले रहे हैं और शहीद हो रहे हैं…… अब वक्त आ गया हैं….हम भी…

एक मुस्कुराता चेहरा ‘सुशांत’…

      क्या कुछ नहीं था सुशांत सिंह राजपूत के पास। दौलत…शोहरत और स्टारडम…। एक इंसान की पूरी उम्र लग जाती है इन सभी चीज़ों को हासिल करने में। फिर…

‘जल’ संकट बन जाएगा ‘महासंकट’

      वर्तमान मेें जिस तरह से कोरोना वायरस का खौफ पूरे विश्व पटल पर छाया हुआ है और हालात यह हो गए है कि उसे वैश्विक महामारी तक…

याद आई भारतीय परंपराएं

             पूरे विश्व में कोरोना के कहर का शोर है। लेकिन कोरोना वायरस से निपटने की ना तो सही दवा की खोज हुई है और…

दो जून की रोटी…

      सदियों से ये एक कहावत चली आ रही है। अकसर हमने कई बार इसका प्रयोग आम बोलचाल के रुप में भी किया होगा। लेकिन  ‘दो जून की रोटी’ …

‘लाला’ की दुकान अब भी है ‘चालू’

    पिताजी का एक ही राग था। ठाला माला मत बैठ कुछ काम धंधा कर लें। लेकिन सोमित को उनका यूं रोज—रोज एक ही राग अलापना बिल्कुल भी अच्छा…

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